सिटीन्यूज़ नॉउ
पंचकूला: अंगदान और विशेष रूप से नेत्रदान के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच पंचकूला से एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। 83 वर्षीय सत्या रानी के निधन के बाद उनके परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए पारस हेल्थ पंचकुला में उनकी आँखें दान कीं। यह निर्णय न केवल मानवता की मिसाल है, बल्कि समाज में अंगदान के महत्व को भी मजबूत संदेश देता है।सत्या रानी पिछले एक महीने से एडवांस स्टेज ओवेरियन कैंसर से जूझ रही थीं, जो पेरिटोनियल मेटास्टेसिस तक फैल चुका था।
भारत में हर वर्ष लगभग 1 लाख कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है, लेकिन दान की संख्या अभी भी काफी कम है। हर साल 25,000 से 30,000 लोग कॉर्नियल अंधता का शिकार होते हैं, जिसे समय पर नेत्रदान से रोका जा सकता है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अंगदान को लेकर समाज में अभी भी जागरूकता की कमी है।
पारस हेल्थ पंचकुला ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे प्रेरणादायक कदम समाज को यह संदेश देते हैं कि मृत्यु के बाद भी जीवन को रोशनी दी जा सकती है। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि वे आगे आकर अंगदान का संकल्प लें और दूसरों के जीवन में उजाला लाने का माध्यम बनें।
