सिटीन्यूज़ नॉउ
चंडीगढ: नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) केवल कॉरपोरेट विवादों के निपटारे की संस्था नहीं, बल्कि राष्ट्र की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह बात एनसीएलटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल ने पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा आयोजित ‘आईबीसी पल्स 2.0’ कॉन्फ्रेंस में मुख्य अतिथि के रूप में कही।
सम्मेलन में न्यायपालिका, कानूनी क्षेत्र, दिवाला विशेषज्ञों और उद्योग जगत से 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (आईबीसी), 2016 के तहत दिवाला समाधान व्यवस्था की समीक्षा करते हुए प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और पूर्वानुमान योग्य बनाने पर चर्चा हुई।न्यायमूर्ति ग्रेवाल ने कहा कि आईबीसी ने देश की दिवाला व्यवस्था को व्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने में अहम योगदान दिया है।
एनसीएलटी के संस्थापक अध्यक्ष न्यायमूर्ति एम.एम. कुमार ने ट्रिब्यूनल के विकास पर विचार रखे। पूर्व न्यायिक सदस्य हरनाम सिंह ठाकुर और डॉ. पी.एस.एन. प्रसाद ने लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए अधिक बेंच, सदस्य और बेहतर बुनियादी ढांचे की जरूरत बताई।
पीएचडीसीसीआई एनसीएलटी एवं आईबीसी समिति के चेयर जी.पी. मदान और डिप्टी सेक्रेटरी जनरल डॉ. जतिंदर सिंह ने संस्थागत मजबूती एवं आईबीसी के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। हरियाणा के अतिरिक्त महाधिवक्ता शेखर राज शर्मा सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी विचार साझा किए।

