सिटीन्यूज़ नॉउ
पंचकूला: पारस हेल्थ पंचकूला में 77 वर्षीय महिला के खराब हो चुके कृत्रिम महाधमनी वाल्व का बिना दोबारा छाती खोले सफल उपचार किया गया। मरीज की 2 सितंबर को वाल्व-इन-वाल्व टीएवीआई प्रक्रिया की गई। यह अस्पताल में 65वीं टीएवीआई प्रक्रिया रही।
मरीज का वर्ष 2020 में महाधमनी वाल्व बदला गया था और 19 मिलीमीटर का जैविक कृत्रिम वाल्व लगाया गया था। पिछले एक वर्ष से उन्हें लगातार सांस फूलने और कभी-कभी बेहोशी की शिकायत थी। जांच में पुराने वाल्व में गंभीर संकुचन पाया गया। उम्र के साथ मधुमेह, उच्च रक्तचाप और पूर्व हृदय सर्जरी के कारण दोबारा ओपन हार्ट सर्जरी को जोखिमपूर्ण माना गया।
विशेषज्ञों की टीम ने पुराने वाल्व के भीतर नया वाल्व लगाने का निर्णय लिया। करीब एक घंटे चली प्रक्रिया में कमर की रक्त नली के जरिए 23 मिलीमीटर का स्व-विस्तारित वाल्व पुराने वाल्व के अंदर सफलतापूर्वक लगाया गया।
मरीज को कोई गंभीर जटिलता नहीं हुई और उनकी हालत में सुधार हुआ।विभागाध्यक्ष डॉ. (मेजर जनरल) नवीन अग्रवाल ने कहा कि उचित मरीजों में वाल्व-इन-वाल्व टीएवीआई दोबारा बड़ी सर्जरी का प्रभावी विकल्प हो सकता है। संस्थान निदेशक डॉ. पंकज मित्तल ने 65वीं टीएवीआई को अस्पताल की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

