सिटीन्यूज़ नॉउ
चंडीगढ़: विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई के इच्छुक भारतीय छात्रों के बीच उज्बेकिस्तान तेजी से एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है। वर्तमान में करीब 16,000 भारतीय छात्र वहां के सरकारी चिकित्सा विश्वविद्यालयों में अध्ययन कर रहे हैं। चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता, क्लिनिकल प्रशिक्षण और नियामकीय सुधारों ने छात्रों व अभिभावकों का विश्वास बढ़ाया है।
ताशकंद स्थित भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया है कि वह उज्बेकिस्तान सरकार और चिकित्सा विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के विदेशी चिकित्सा स्नातक लाइसेंस विनियम (एफएमजीएल), 2021 के अनुरूप शैक्षणिक व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने पर कार्य कर रहा है। दूतावास ने यह भी स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल 2026 को जारी एनएमसी का अलर्ट किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं, बल्कि छात्रों को मान्यता प्राप्त संस्थानों का चयन करने संबंधी सलाह है।
दूतावास ने भारतीय छात्रों के लिए विस्तृत दिशानिर्देश भी जारी किए हैं, जिनमें एफएमजीएल अनुपालन, प्रवेश प्रक्रिया और मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों की जानकारी दी गई है। अंदीजान, बुखारा, समरकंद और ताशकंद सहित कई सरकारी चिकित्सा संस्थानों में भारतीय छात्र अध्ययनरत हैं।
दिसंबर 2025 की एफएमजीई परीक्षा में उज्बेकिस्तान का लगभग 42 प्रतिशत सफलता प्रतिशत भी चर्चा का विषय रहा है, जिसे शिक्षा विशेषज्ञ वहां की बेहतर शैक्षणिक गुणवत्ता और क्लिनिकल प्रशिक्षण का सकारात्मक संकेत मान रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-उज्बेकिस्तान के बढ़ते शैक्षणिक सहयोग और संस्थागत समर्थन से वर्ष 2026 में भी यह देश भारतीय छात्रों के लिए एमबीबीएस का प्रमुख विकल्प बना रहेगा।

