सिटीन्यूज़ नॉउ
चंडीगढ़: विश्व पादरियों की पहली संयुक्त सभा हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित हुई, जिसमें विभिन्न देशों के ईसाई धर्मगुरुओं ने धार्मिक स्वतंत्रता, मानवाधिकारों और धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर रहे लोगों के अधिकारों की सुरक्षा पर विचार-विमर्श किया। कोरिया, भारत सहित विभिन्न देशों में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय पहल में एशिया, अफ्रीका, यूरोप समेत अन्य क्षेत्रों के करीब 3,000 पादरियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन भाग लिया।
सभा का आयोजन सात धार्मिक संगठनों ने किया, जिनमें काउंसिल फॉर क्रिश्चियन म्यूचुअल ग्रोथ, कोरिया क्रिश्चियन लीडर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, पास्टर्स अलायंस फॉर लाइफ एंड ह्यूमन राइट्स, रशियन इवेंजेलिकल अलायंस और थाई इवेंजेलिकल अलायंस एसोसिएशन शामिल रहे। नई दिल्ली कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं संचालन न्यू टेस्टामेंट चर्च के अनिल कुमार मसीह ने किया।
सभा में धार्मिक विश्वास के कारण उत्पीड़न, भेदभाव और दबाव झेल रहे लोगों के अधिकारों तथा मानव गरिमा की रक्षा पर जोर दिया गया। विशेष वीडियो प्रस्तुति में 95 वर्षीय शिनचोनजी चेयरमैन ली मान-ही की दक्षिण कोरिया में हिरासत का मुद्दा उठाया गया। प्रतिभागियों ने उचित कानूनी प्रक्रिया, मानवीय परिस्थितियों और धार्मिक स्वतंत्रता के महत्व पर चर्चा की।
समापन पर पादरियों ने संयुक्त याचिका पर हस्ताक्षर कर धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता जताई। आयोजकों ने 1,000 ईसाई सदस्यों का व्यापक संगठन बनाने की पहल की भी घोषणा की।

