सिटीन्यूज़ नॉउ
चंडीगढ़: आयुर्वेद विशेषज्ञ, उद्यमी एवं विचारक डॉ. मोनिका बी. सूद की पुस्तक ‘द इकोनॉमिक डीएनए ऑफ भारत’ भारत की आर्थिक यात्रा को सभ्यता, इतिहास, मनोविज्ञान और राष्ट्रीय विकास के नजरिए से समझने का प्रयास करती है। पुस्तक का प्रकाशन साइमन एंड शूस्टर इंडिया ने किया है।
दस अध्यायों वाली इस पुस्तक में भारत के सभ्यतागत अतीत को वर्तमान आर्थिक व्यवस्था और ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य से जोड़ा गया है। डॉ. सूद के अनुसार भारत के आर्थिक डीएनए को तीन प्रमुख विचारों—धर्म, निर्माण और आत्मनिर्भरता—के माध्यम से समझा जा सकता है।
पुस्तक में प्राचीन भारत के समुद्री व्यापार, कृषि, चिकित्सा, ज्ञान, शासन और सामुदायिक नेटवर्क से लेकर आज के डिजिटल सार्वजनिक ढांचे, स्टार्टअप, स्वदेशी विनिर्माण, तकनीकी नवाचार, वित्तीय समावेशन और रणनीतिक स्वायत्तता तक की यात्रा को रेखांकित किया गया है।
डॉ. सूद ने कहा कि अर्थव्यवस्था केवल पूंजी, श्रम और नीतियों से नहीं बनती, बल्कि समाज के व्यवहार और मूल्यों का भी उस पर गहरा प्रभाव पड़ता है।पुस्तक की भूमिका केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लिखी है। वहीं पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और अन्य प्रमुख हस्तियों ने भी पुस्तक के प्रति समर्थन व्यक्त किया है।

