सिटीन्यूज़ नॉउ
चंडीगढ: बच्चों के लिए पढ़ाई तभी प्रभावी बन सकती है, जब वह बोझ के बजाय जिज्ञासा और आनंद का माध्यम बने। कविता, संगीत, खेल और गतिविधियों के जरिए सिखाने से न केवल बच्चों की रुचि बढ़ती है, बल्कि उनकी समझने, सोचने और अभिव्यक्त करने की क्षमता भी विकसित होती है।
शुरुआती शिक्षा में ऐसे बदलाव समय की जरूरत बनते जा रहे हैं।इसी विषय पर मैकमिलन एजुकेशन इंडिया ने 31 अक्टूबर को शिक्षकों के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित की। इसमें चंडीगढ़, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के करीब 80 स्कूलों के शिक्षक और प्रधानाचार्य शामिल हुए। विशेषज्ञ डॉ. दीपाली सिंह ने संगीत, कविताओं और गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाने के प्रभावी तरीकों पर विचार साझा किए।
इस अवसर पर ‘हॉप स्किप एंड जंप’ और ‘अल्टूरा एआईआर’ भी प्रस्तुत किए गए।मैकमिलन एजुकेशन इंडिया के प्रतिनिधियों ने बातचीत करते हुए बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति और एनसीईआरटी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बच्चों की प्रगति का आकलन और उनकी कमजोरियों की पहचान जरूरी है। उन्होंने कहा कि तकनीक शिक्षक का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक माध्यम है।
बच्चों का अनावश्यक पर्दा-दर्शन सीमित रखते हुए उन्हें समान सीखने के अवसर देना भी आवश्यक है। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त अतिरिक्त उपायुक्त राकेश कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

