सिटीन्यूज़ नॉउ
चंडीगढ़: पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की 12वीं इन-आउट प्रदर्शनी में बेंगलुरु स्थित ‘एथोस’ की संस्थापक आर्किटेक्ट गीता बालकृष्णन ने वास्तुकला को समाज, समुदाय और विरासत से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया।
वह अब पंजाब में 100 किलोमीटर की यात्रा कर राज्य की विरासत वास्तुकला और पारंपरिक निर्माण शैली का अध्ययन करेंगी।बालकृष्णन ने 2022 में कोलकाता से नई दिल्ली तक 1,700 किलोमीटर की ‘वॉक फॉर आर्क्स’ यात्रा करीब 70 दिनों में पूरी की थी।
सात राज्यों से गुजरते हुए उन्होंने छात्रों, ग्रामीणों, निर्माण श्रमिकों और पेशेवरों से संवाद कर स्थानीय निर्माण परंपराओं और लोगों के निर्मित परिवेश से संबंधों को समझा।प्रस्तावित पंजाब यात्रा में वह कॉलेज विद्यार्थियों के साथ विरासत स्थलों का दौरा करेंगी। इसका उद्देश्य युवाओं को पंजाब की वास्तुकला, पारंपरिक निर्माण पद्धतियों, बस्तियों और सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराना तथा विरासत संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
बालकृष्णन का मानना है कि वास्तुकला केवल इमारतों तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक चुनौतियों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। एथोस के माध्यम से वह वास्तुकला, शिक्षा और समाज के बीच बेहतर संवाद को बढ़ावा दे रही हैं।

