सिटीन्यूज़ नॉउ
मोहाली: : फतेहगढ़ साहिब के 17 माह के मासूम ओमांष वशिष्ठ के लिए मैक्स अस्पताल, मोहाली के विशेषज्ञ डॉक्टरों की तत्परता और सटीक निदान जीवनरक्षक साबित हुआ। गंभीर आंतों के संक्रमण जैसे लक्षणों के साथ अस्पताल पहुंचे बच्चे में चिकित्सकों ने दुर्लभ वार्म ऑटोइम्यून हेमोलाइटिक एनीमिया (AIHA) की पहचान कर सफल उपचार किया। उपचार के बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य गतिविधियों में लौट आया।
ओमांष को करीब 10 दिनों से खूनी दस्त और पांच दिनों से तेज बुखार था। अस्पताल पहुंचने पर वह अत्यधिक पीला और डिहाइड्रेटेड था तथा उसे पीलिया भी था। जांच में उसका हीमोग्लोबिन बेहद कम पाया गया। शुरुआती लक्षण गंभीर आंतों के संक्रमण की ओर संकेत कर रहे थे, लेकिन विस्तृत जांच के दौरान बीमारी की वास्तविक वजह सामने आई।
बाल रोग विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ. मनु शर्मा के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने AIHA का निदान किया। यह एक दुर्लभ ऑटोइम्यून रक्त विकार है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपनी ही लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट करने लगती है।डॉक्टरों ने बिना देरी किए बच्चे को रक्त चढ़ाने के साथ एंटीबायोटिक्स और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने वाली दवाएं शुरू कीं। उपचार के दौरान उसे चार बार रक्त चढ़ाया गया, जिसके बाद हीमोग्लोबिन स्तर में लगातार सुधार दर्ज किया गया।करीब आठ दिन के उपचार के बाद बच्चे की हालत स्थिर हुई और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉक्टरों के अनुसार, ऐसे मामलों में समय पर पहचान और उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है।डॉ. शर्मा ने कहा कि लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षण, असामान्य थकान और गंभीर एनीमिया को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अभिभावकों और स्वास्थ्यकर्मियों में जागरूकता बढ़ने से ऐसी दुर्लभ बीमारियों का समय रहते निदान कर गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता

