सिटीन्यूज़ नॉउ
चंडीगढ़: सामाजिक नीति की शोधकर्ता नज़म धवन ने मीडिया में जारी एक वक्तव्य में कहा है कि चंडीगढ़ में रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए ज़ोन तय करने की प्रक्रिया में मानवीय सोच अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि शहर के विकास के साथ-साथ लोगों के रोजगार और आजीविका के अधिकार का भी पूरा सम्मान होना चाहिए।
चंडीगढ़ नगर निगम द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार स्ट्रीट वेंडरों के ज़ोन तय करने की प्रक्रिया पर प्रतिक्रिया देते हुए धवन ने कहा कि शहर में व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन ऐसा करते समय उन छोटे विक्रेताओं को उन जगहों से नहीं हटाना चाहिए जहाँ से उनकी अच्छी कमाई होती है।
,इसके बजाय ऐसे वेंडिंग जोन बनाए जाएँ जहाँ छाया वाले स्टॉल, साफ़ पीने का पानी, कूड़ा प्रबंधन, शौचालय जैसी सुविधाएँ हों और जहाँ उन्हें वास्तव में अच्छा व्यापार करने का अवसर मिले।उन्होंने कहा कि वास्तविक और टिकाऊ विकास वही है जो समाज के सबसे कमजोर लोगों की गरिमा और रोज़ी-रोटी की रक्षा करे। शहर की सुंदरता और आर्थिक न्याय—दोनों को साथ लेकर चलना चाहिए, किसी एक की कीमत पर नहीं।

